Sunday, July 19, 2026

कविता: बतिया बतादी का ?

सुननी-ह डर भागे लागल

सरसुविधा गावे आवे लागल

कबसे इ नेतवन अब खुदके..

धर्तिपुत्र बतावे लागल ।

 

फागुनके जाडा इ आपन..

रङ रुप देखावे लागल

सोच सोचमे बुझनी ना हम..

चाल-लोगनके समझावे लागल ।

 

जस ठण्डीके ना चोट लउके..

ना दोदरा खुन निसानीके

ठिक ओसही लोगवा घात देवे..

उठे खुन-खौल जवानीके ।

 

मन सगरी इ अझुराइल बा

आज लोगवन कहा बिराइल बा

खुद आपनके ना बात करे..

आज अनकर झागरा फरिआइल बा ।

रजनिश कुमार साह 

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